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Toggleऑपरेशन ब्लू स्टार | Operation Blue Star
31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अंगरक्षक सतवंत सिंह और बेअंत सिंह द्वारा उनकी हत्या करने के चार महीने पहले भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार को पंजाब के स्वर्ण मंदिर में अंजाम दिया गया था।

पृष्ठभूमि
यहां ऑपरेशन भारत में खालिस्तान आंदोलन का परिणाम था| यह आंदोलन भारत स्वतंत्र होने के बाद सन 1970 और 1980 के दशक में पंजाब को भारत से अलग करके खालिस्तान नमक नए राष्ट्र बनाने के लिए था| पंजाब में खलिस्तान आंदोलन बढ़ रहा था, जिसका नेतृत्व कर रहे थे जरनेल सिंह भिंडरावाले उन्होंने जालंधर के पास पंजाब रोडवेज के बस में सवार सभी हिंदुओं की हत्या कर दी | 1980 में देश में कांग्रेस सत्ता में आ गई और इंदिरा गांधी सरकार ने पंजाब में बढ़ती हिंसा को देख पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू दिया।
हिंद समाचार पंजाब केसरी अखबार समूह के संपादक लाला जगत नारायण की सितंबर 1981 में हत्या कर दी गई| पंजाब में भिंडरावाले की जोरदार पकड़ थी फिर पंजाब पुलिस के उप महानिरीक्षक ए. एस. अटवाल की हत्या अप्रैल 1983 में स्वर्ण मंदिर परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
खालिस्तानियों ने स्वर्ण मंदिर में ली शरण
खालिस्तान गतिविधियां बढ़ रही थी जरनैल सिंह भिंडरावाले पर हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप था भिडरावाले ने 15 दिसंबर 1983 में अपने हथियारबंद साथियों के साथ स्वर्ण मंदिर के अकाल तख्त पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। भिडरावाले के अकाल तख्ते पर कब्जे का विरोध स्वर्ण मंदिर के प्रमुख ग्रंथि कृपाल सिंह ने किया परंतु भिंडरावाले ने किसी की नहीं सुनी और इंदिरा गांधी को चुनौती दे डाली भिंडरावाले और उसके सहयोगी पंजाब से हिंदुओं को भगाने के लिए मजबूर कर रहे थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के पहले 298 लोग मारे जा चुके थे 1984 में 1 से 6 जून तक सेना ने कार्यवाही करके सभी उग्रवादियों को मार गिराया
ऑपरेशन ब्लू – स्टार प्रत्यक्ष कार्यवाही
ऑपरेशन ब्लू स्टार का उद्देश्य स्वर्ण मंदिर परिसर से जरनेल सिंह भिंडरावाले को बाहर निकलना और हर मंदिर सहब पर नियंत्रण हासिल करना था इंदिरा गांधी को डर था कि यह मामला किसी बड़ी हिंसा का रूप ना ले-ले इसलिए उन्होंने इससे निपटने के लिए भारतीय सेना की मदद ली 1 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर सेवा के हवाले कर दिया गया। सेना का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल कुलदीप सिंह ब्रार कर रहे थे। 2 जून 1984 को इंदिरा गांधी दूरदर्शन पर आई और कहा कि पंजाब में अराजकता फैली है लूट मार हो रहे हैं अगर आपको किसी बात पर संदेह है तो आईए इसे बातचीत से हल करने की कोशिश करते हैं मगर इससे काम नहीं बना इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर पर सेना भेजने का फैसला कर लिया और कोड था ऑपरेशन ब्लू स्टार ब्लू स्टार मतलब नीला आसमान और तारे है इसे आधी रात को अंजाम देना था।
ऑपरेशन ब्लू – स्टार की शुरुआत
3 जून को पंजाब में बिजली, परिवहन और संचार के सभी साधन बंद करके पंजाब में 36 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया और 3 जून को सेना के हजारों सैनिकों ने टैंकों और तोपों के साथ स्वर्ण मंदिर को चारों तरफ से घेर लिया पत्रकारों को भी बाहर भेज दिया गया।
लोगों को स्वर्ण मंदिर परिसर से बाहर आने को कहा गया परंतु 5 जून तक सिर्फ 129 लोग ही बाहर आपाए क्योंकि भिंडरावाले के लोग बाहर आने से रोक रहे थे।
5 जून 1984 के शाम को सेना की कार्यवाही शुरू हुई रात भर दोनों तरफ से जोरदार गोलीबारी चली 6 जून की सुबह यह तय किया गया की अकाल तख्त में छुपे खालिस्तानियों को बाहर निकालने के लिए तोपों को लगाना होगा इसी दौरान किताबों की लाइब्रेरी में आग लग गई अकाल तख्त को भी भारी नुकसान हुआ रात तक जरनल सिंह भिंडरावाले और उसके साथियों का सफाया हुआ। इस ऑपरेशन में 83 सैनिक शहीद हुए 249 घायल हुए साथ में 493 लोगों की भी मौत हुई और 86 लोग घायल हुए।
इस विषय पर बार-बार पूछे गए प्रश्न
प्रश्न. ऑपरेशन ब्लू स्टार को कब अंजाम दिया गया ?
उत्तर :- 6 जून 1984
प्रश्न. ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय खालिस्तानीयो का नेता कौन था ?
उत्तर :- जरनैल सिंह भिंडरावाले
प्रश्न. ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
उत्तर :- प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
प्रश्न. ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय सेना का नेतृत्व किसने किया था ?
उत्तर :- जनरल कुलदीप सिंह ब्रार
