चापचर कुट महोत्सव मिजोरम | Chapchar Kut Festival in Mizoram 

चापचर कुट महोत्सव मिजोरम | Chapchar Kut Festival in Mizoram 

चापचर फुट महोत्सव भारत के उत्तर पूर्वी राज्य मिजोरम राज्य का एक त्यौहार है, जो कि भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे मिजोरम राज्य के मिजो जनजाति द्वारा झूम कृषि के कार्य के पूरा होने के पश्चात हर साल मार्च माह के पहले शुक्रवार को बहुत ही उल्हास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह महोत्सव 1 मार्च 2024 को मनाया जा रहा है।

चापचर कुट महोत्सव मिजोरम | Chapchar Kut Festival in Mizoram 

हर साल वर्ष की शुरुआत में पहाड़ी पर किए जाने वाले झूम खेती के लिए जंगल के ढलान भाग पर किए जाने वाली सफाई के दौरान जीवित हानी से बचने के लिए देवी-देवताओं को धन्यवाद करने के लिए यह त्यौहार मनाया जाता है।

त्योहार के दिन लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं, और बहुत ही धूमधाम से अपना पारंपरिक नृत्य चेराव नृत्य करते हैं। इस नृत्य में 8 से 10 युवक और युवतियां एक साथ पूरी रात नाचते हैं, जिसमें पुरुष बांस की लड़कियों को गाने की धुन पर थप थप आते हैं और महिलाएं बांस की लड़कियों के बीच नृत्य करती है। चापचर कुट महोत्सव को पहली बार भारतीय स्वतंत्रता के बाद मिजोरम की राजधानी आइजोल में बडे पैमाने पर मनाया गया।

पुरानी दंत कथाओं के अनुसार चापचर कुट उत्सव की शुरुआत सबसे पहले वर्ष 1450 से 1700 ई. स. के बीच म्यांमार (बर्मा) के पहाड़ी गांवों में हुई थीं। त्यौहार में शराब और मांस के साथ पूरे गांव में बड़ी दावत रखी जाती है।

झूम खेती मिजो लोगों की पारंपरिक खेती है, जिसके लिए वहां के लोग पहाड़ियों पर जंगल काटते हैं और सूखने के बाद उनके तने और पत्ते जला देते हैं। यह कठिन कार्य समाप्त हो जाने के बाद चापचर कुट महोत्सव मार्च के पहले शुक्रवार को मिजो जनजाति द्वारा बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

 ड्रम, घंटा और बांसुरी मिजो जनजाति के पारंपरिक संगीत वाद्य यंत्र है। परंतु अब इनका उपयोग धीरे-धीरे कम होते जा रहा है। लोग तेजी से पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित होकर पश्चिमी संगीत और परंपराएं अपना रहे हैं

 झूम खेती पहाड़ी क्षेत्र में की जाने वाली एक पारंपरिक और प्रचलीत खेती है। जिसमें पहाड़ियों के ढलान पर वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उनके सुख जाने पर उन्हें जला दिया जाता है और बाद में इस भूमि में जुताई करके बीज बो दिए जाते हैं। इस तरह दो-तीन साल तक लगातार खेती की जाती है, बाद में फिर से नए पेड़ पौधे उगाने तक इस भूमि को छोड़ दिया जाता है। और फिर से यही प्रक्रिया दौराई जाती है। इस वजह से इस तरह की खेती को झूम खेती या स्थानांतरित खेती भी कहा जाता है। इस तरह की खेती मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय वन क्षेत्र में की जाती है।

1 ) चापचर फुट महोत्सव भारत के किस राज्य में मनाया जाता है ?

उत्तर : चापचर फुट महोत्सव भारत के उत्तर पूर्वी राज्य मिजोरम राज्य मे मनाया जाता है।

2 ) चापचर फुट महोत्सव किस जनजाति द्वारा मनाया जाता है ?

उत्तर : चापचर फुट महोत्सव मिजोरम राज्य की मिजो जनजाति द्वारा मनाया जाता है।

3 ) चापचर फुट महोत्सव कब मनाया जाता है ?

उत्तर : झूम कृषि के कार्य के पूरा होने के पश्चात हर साल मार्च माह के पहले शुक्रवार को बहुत ही उत्साह के साथ चापचर फुट महोत्सव मनाया जाता है।

4 ) झूम खेती कैसे की जाती है ?

उत्तर : पहाड़ियों के ढलान पर वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उनके सुख जाने पर उन्हें जला दिया जाता है और बाद में इस भूमि में जुताई करके बीज बो दिए जाते हैं।

5 ) चापचर फुट महोत्सव क्यों मनाया जाता है ?

उत्तर : झूम खेती के लिए जंगल के ढलान भाग पर किए जाने वाली सफाई के दौरान जीवित हानी से बचने के लिए देवी-देवताओं को धन्यवाद करने के लिए यह त्यौहार मनाया जाता है। 


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