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ToggleStatue of Valour (लचित बोरफुकन)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के जोरहाट जिले में अहोम साम्राज्य के महान सेनापति लाचित बोरफुकन की कब्रगाह पर 125 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा टेओक के पास होल्लोंगापार में लाचित बरफुकन मैदाम विकास परियोजना में ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का अनावरण किया गया। इस परियोजना में एक संग्रहालय भी शामिल है, जिसमें 500 सीटों की क्षमता वाला एक सभागृह और एक छात्रावास बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लचित बोरफुकन की प्रतिमा के अनावरण के लिए एक अहोम अनुष्ठान में भाग लिया।
पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित राम वनजी सुतार द्वारा इस प्रतिमा की निर्मित की गई, प्रतिमा की ऊंचाई 84 फीट है और इसे 41 फीट के पेडस्टल पर स्थापित किया गया है, जिससे इसकी कुल ऊंचाई 125 फीट हो जाती है।
‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ की लागत और शुरुआत
लाचित बरफुकन मैदाम विकास परियोजना के अंतर्गत ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ की नींव पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद द्वारा फरवरी 2022 में रखी गई थी। जो की 16.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस परियोजना के निर्माण कार्य के लिए 214 करोड रुपए कुल लागत बताई गई है। इस परियोजना को असम के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
लाचित बोरफुकन
लाचित बोरफुकान का जन्म 24 नवंबर 1622 में असम के चराइदेव, अहोम साम्राज्य में हुआ था। और वह अहोम साम्राज्य (1228-1826) के एक प्रसिद्ध सेना कमांडर थे, जिन्होंने वर्ष 1671 में हुए ‘सरायघाट के युद्ध’ में राजा रामसिंह-प्रथम के नेतृत्व वाली अत्यधिक श्रेष्ठ मुगल सेना को हराकर उनके असम राज्य को जीतने के प्रयास को विफल कर दिया था। लचित बोरफुकान को 1671 की ‘सरायघाट की लड़ाई’ में उनके नेतृत्व और पराक्रम के लिए जाना जाता है।
परंतु बीमारी के कारण 49 वर्ष की आयु में ‘सरायघाट की लड़ाई’ के एक साल बाद 25 अप्रैल 1972 में उनका निधन हो गया। उसके बाद उन्हें होल्लोंगापार में ‘मैदाम’ जोरहाट,असम में दफनाया गया। वहा अहोम राजघरानों और रईसों के लिए कब्रिस्तान होते थे।
कौन है राम वनजी सुतार ?
पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित और अनुभवी मूर्तिकार राम वनजी सुतार द्वारा लाचित बरफुकन की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का निर्माण यूपी के गाजियाबाद में उनके स्टूडियो में किया गया था।
उन्होंने इससे पहले गुजरात के एक टापू साधू बेट पर स्थित 182 मीटर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण किया था। साथ ही अयोध्या के राम मंदिर के लिए 251 मीटर ऊंची भगवान श्री राम की प्रतिमा तैयार करने की जिम्मेदारी भी राम वनजी सुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार को दी गई है।
उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह, भगवान शिव, छत्रपति शिवाजी महाराज आदी की प्रतिमाओं की निर्मिती भी की है।
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं
स्टैच्यू ऑफ वेलोर संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न
1 ) किस राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का अनावरण किया गया ?
उत्तर : असम के जोरहाट जिले में लाचित बोरफुकन की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का अनावरण किया गया।
2 ) ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ प्रतिमा की ऊंचाई कितनी है ?
उत्तर : ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ प्रतिमा की ऊंचाई 125 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा है।
3 ) लाचित बोरफुकन की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का निर्माण किसके द्वारा किया गया ?
उतर : पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित राम वनजी सुतार द्वारा लाचित बरफुकन की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का निर्माण किया गया।
4 ) लाचित बोरफुकन किस साम्राज्य के सेनापति थे ?
उत्तर : लाचित बोरफुकन अहोम साम्राज्य (1228-1826) के एक प्रसिद्ध सेना कमांडर थे।
5 ) लाचित बोरफुकन की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का निर्माण कार्य कितने रुपए की लागत से किया गया ?
उत्तर : 214 करोड रुपए कुल लागत से लाचित बोरफुकन की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वेलोर’ का निर्माण किया गया।
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